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Reasoning Study Material in Hindi PDF Download Complete Reasoning Notes

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Reasoning एक ऐसा subject है जिसमे से लगभग सभी सरकारी परीक्षाओ में प्रश्न पूछे जाते है। Reasoning पेपर को सिलेबस में शामिल करने के पीछे का उद्देश्य है छात्रों की तार्किक शक्ति का पता लगाना। परीक्षाओ में रीजनिंग से जुड़े आसान सवाल भी कई बार इस तरह से पुछे जाते है की हमे प्रश्न समझने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अतः आवश्यक है प्रश्न को ध्यान पूर्वक पढ़ा जाये एवं समझा जाये जिससे की आसानी से प्रश्न हल किया जा सके। छात्रों की सुविधा के लिए यह हमने Reasoning Study Material in Hindi PDF में दिया हुआ है।  जिससे की आप Reasoning Notes को डाउनलोड कर सके।

Contents [show]

Reasoning Guide Topic Wise Study Notes

लगभग हर परीक्षा में Reasoning से जुड़े सवाल पूछे जाते है जिससे की छात्र की मानसिक योग्य का पता चलता है। इसके अंतर्गत कुछ टोपिक्स जैसे है जो की छात्रों को कन्फ्यूज़न पैदा करते है एवं कई बार साल भी एक जैसे ही प्रतीत होते है। इसलिए आवश्यक है की Reasoning के Topics को अच्छी तरह से समझा जाये जिससे की सवाल हल करने में काम समय लगे एवं आसानी से हर सवाल हल हो सके। छात्रों की सुविधा के लिए यह हमने Reasoning Study Material in Hindi PDF में दिया हुआ है जिससे की हर टॉपिक को समझने में आसनी रहे एवं परीक्षा के दौरान आप सवाल पढ़ कर कंफ्यूज न हो।

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Reasoning Notes in Hindi (Topics List)

Reasoning को समझने के लिए आवश्यक की सबसे पहले हम इसके महत्वपूर्ण टॉपिक्स को जाने। इसके लिए हमने Reasoning टॉपिक्स की सूची नीचे दी हुई है। इस सूची को देखने के बाद आपको पोस्ट में दिया हुआ Study Material समझने में आसानी रहेगी। यह Reasoning का Study Material Hindi में दिया हुआ है जिससे की अधिक से अधिक छात्र इस पोस्ट के जरिये लाभ उठा सके।

1.   सादृश्यता या सम संबंध
2.   रक्त संबंध
3.   वर्गीकरण
4.   दिशा एवं दूरी
5.   श्रृंखला
6.   लुप्त संख्या ज्ञात करना/ बौद्धिक गणित
7.   पदानुक्रम
8.   वेन आरेख
9.   कोडिंग एवं डिकोडिंग ( कूटीकरण तथा आकूटीकरण/ संकेतन और विसंकेतन)
10. विशेलषणात्मक तर्कशक्ति
11. वर्ग पूर्ती
12. आकृति पूर्ती

 

1. सादृश्यता या सम संबंध (Analogy)-

सादृश्यता या सम संबंध (Analogy) मानसिक योग्यता परिक्षण का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रायः अपरिहार्य अध्याय है। सादृश्यता का शाब्दिक अर्थ होता है “देखने में समान” अर्थात कोई भी दो वस्तुए, चित्र या आकृतियां जो देखने किसी न किसी तरह से समान हो अथवा एक जैसी दिखती हो या एक जैसी प्रतीत होती हो । सादृश्यता या समसंबंध का मुख्य लक्षण या मुख्य विशेषता अथवा इसके विशिष्ट गुण, मानसिक योग्यता की दृष्टि से, किन्ही दो शब्दों, चित्रों या आकृतियों के आपसी संबंध की समानता में निहित होते है। सादृश्यता को कुछ अन्य नामो से जैसे की सम संबंध या सह संबंध से भी जाना जाता है। सादृश्यता के अंतर्गत पूछे जाने वाले प्रश्नो के दो भाग होते है- (i.) समस्या आकृतियां (ii.) उत्तर आकृतियां ।

समस्या आकृतियों में तीन आकृतियां दी जाती है तथा चौथी आकृति के स्थान पर प्रश्नवाचक चिन्ह होता है। आपको इसी प्रश्नवाचक आकृति के स्थान पर आने वाली आकृति का चयन करना होता है। दी गयी समस्या आकृतियों में से जिस प्रकार का संबंध पहली और दूसरी समस्या आकृति में होता है ठीक उसी प्रकार का संबंध तीसरी समस्या आकृति का संबंध चौथी समस्या आकृति अर्थात उत्तर से होता है। अतः सही उत्तर ज्ञात करने के लिए प्रश्न में दी गयी दो समस्या आकृतियों के बीच के संबंध का पता लगाना आवश्यक होता है। सादृश्यता संबंधी प्रश्नो में दी गयी प्रथम दो एवं अंतिम दो समस्या आकृतियों का संबंध उनके घूर्णन (Rotation), परिक्रमण (Revolution), विचलन (Deviation), विस्थापन (Deflection), संचलन (Movement), वृद्धि या कमी (Addition / Subtraction) अर्थात आकृतियों की संख्या में वृद्धि या कमी आदि पर आधारित होता है।   सादृश्यता के अंतर्गत आने वाले विभिन्न प्रकार के प्रश्नो के विषय में स्पष्ट एवं अधिक जानकारी के लिए उन्हें निम्न प्रकार में बांटा जा सकता है।

(i.)प्रथम प्रकार (Type -1)- स्वरुप या आकार परिवर्तन पर आधारित

(ii.) द्वितीय प्रकार (Type -2)- दिशा परिवर्तन पर आधारित

(iii.)तृतीय प्रकार (Type – 3)- स्थान परिवर्तन पर आधारित (स्थानों के आदान प्रदान पर भी)

(iv.)चतुर्थ प्रकार (Type – 4)- संख्या परिवर्तन पर आधारित (कमी या वृद्धि)

(v.)पंचम प्रकार (Type – 5)- विविध

2. रक्त संबंध (Blood Relationship)-

इस टॉपिक में आने वाले प्रश्नो के माध्यम से मानवीय रिश्तो अर्थात पारिवारिक संबंधो या रक्त संबंधो (खून के रिश्तो) से संबंधित आपके ज्ञान की जांच की जाती है।  इस प्रकार के प्रश्नो में किन्ही दो व्यक्तियों या न्य अनेक व्यक्तियों के आपसी (पारस्परिक) संबंधो का विवरण दिया जाता है। तथा उस विवरण के आधार पर अन्य व्यक्तियों या किसी व्यक्ति विशेष के साथ किसी एक व्यक्ति के संबंध को निरूपित करने के लिए कहा जाता है।

सामन्तया रक्त संबंध पर आधारित प्रश्न हमारे या आपके व्यक्तिगत या पारिवारिक जीवन से जुड़े होते है क्योकि रक्त संबंधो की कड़ियों के द्वारा हम अपने संबंधियों या रिश्तेदारों से जुड़े होते है। इस प्रकार के रक्त संबंधी प्रश्नो को शुद्धता से तथा शिग्र्हतापूर्वक हल करने के लिए मूल आधार स्वंय को ही मानना श्रेयस्कर होता है। रक्त संबंधो पर आधारित प्रश्नो को “निगमन तरीका” (Deduction method) या आरेख (Diagram) के माध्यम से हल किया जा सकता है। परन्तु इस प्रकार के प्रश्नो को सुगमतापूर्वक हल करने के लिए आपसी (पारिवारिक एवं सामजिक) रिश्तो का ज्ञान होना आवश्यक माना जाता है।

१. दादा- दादी     २. नाना- नानी

३. माता- पिता    ४. भाई- बहिन

५. पिता- पुत्र       ६. माँ – बेटा

७. पिता- पुत्री      8. माँ – बेटी

९. दादा- दादी     १०.बुआ- भतीजी

११. बहिन- बहिन   १२. भाई- भाई

१३. मांमा – भांजा    १४. बहिन- बहिनोइ

१५, मांमा- भांजी

3. वर्गीकरण –

वर्गीकरण या विजातीय परीक्षण सामन्य मानसिक योग्यता के अंतर्गत आने वाले विभिन्न अध्यायों में एक महत्वपूर्ण और अत्यंत आसान अध्याय है। आप अपने आसपास के वातावरण एवं घटनाओ से किस हद तक परिचित है, वास्तव में इसी बात की जांच इस अध्याय में दिए गए प्रश्नो के माध्यम से की जाती है। मान लीजिये की छनितु को कुछ वस्तुए दी जाये और उससे कहा जाये की इन दी गयी चीजों में से एक समान गुण वाली या संबंध वाली चीजों की छांट कर एक तरफ या एक समूह में रख दो तो वह क्या करेगा, यदि दी गयी वस्तुए हो-

गेंद, किताब, कलम, बल्ला, विकेट, कॉपी,पेंसिल ।  दी गयी वस्तुओ को देख लेने से या उनके नाम जान लेने से इतना तो पता चल ही जाता है की इन दी हुई वस्तुओ में दो प्रकार की वस्तुए है।

एक प्रकार की वस्तुए जहाँ खेल से संबंधित है एवं दूसरी प्रकार की वस्तुए पढ़ाई लिखाई से संबंधी है। अतः स्पष्ट है की चिंटू इन चीजों को दो अलग अलग समूहों में रखेगा।

एक समूह में या एक स्थान पर यदि वह किताब, कलम, कॉपी, पेंसिल जैसी वस्तुए रखेगा तो दूसरे स्थान पर वह गेंद, बात, विकेट आदि कहल संबंध वस्तुए रखेगा।

मै समझता हूँ की इस प्रकार के प्रश्नो को हल करना अब आपके लिए अत्यंत आसान है। फिर भी आपकी सुविधा और आपको शंका से पूरी तरह मुक्त कर देने के लिए नीचे कुछ साधित उदहारण दिए जा रहे है।  इन्हे ध्यानपूर्वक देखे जिससे की आपको इस प्रकार के प्रश्नो को समझने आसानी रहे।

  1. (a.) आँख (b.) नाक

(c). कान             (d.) जूता

ans. जूता

  1. (a.) दस्ताने (b.) जूते

(c.) चप्पल          (d.) मोज़े

ans.दस्ताने

4. दिशा और दूरी –

सामान्तया इस टॉपिक  में किसी व्यक्ति या वास्तु द्वारा चारो मूल दिशाओं या दसो दिशाओं में चलने, घूमने या भ्रमण करने अथवा उनके द्वारा बांये या दाएं मुड़ने तथा अंतिम स्तिथि तक पहुंचने में होने वाले परिवर्तन पर आधारित प्रश्न भी पूछे जाते है।

इन प्रश्नो में दिशाओं एवं दूरी अतरहवा दिशाओं या दूरी का क्रमिक अनुवर्तन तैयार किया जाता है तथा प्रश्न में दी गयी सूचना के आधार पर अभ्यर्थियों से आरंभिक बिंदु या प्रस्थान विन्दु और अंतिम बिंदु के बीच न्यूनतम दूरी के संदर्भ में अंतिम दिशा और तय की गयी दूरी दोनों से संबंधित प्रश्न पूछे जाते है।

इस प्रकार के प्रश्नो को हल करने के लिए पाइथोगोरस प्रमेय काफी लाभदायक सिद्ध होती है।

पाइथोगोरस प्रमेय (केवल समकोण त्रिभुज के लिए)-

a² + b² = c²

(कर्ण)2=(लम्ब)2+(आधार)2

5. श्रृंखला-

श्रृंखला पर आधारित प्रश्नो में कुछ अंबक/ संख्याए दी जाती है जो एक निश्चित क्रम या शैली में व्यवस्तिथ होती है। ये निश्चित शैली में व्यवस्थित अंक एक श्रृंखला का निर्माण करते है, जिसकी एक कड़ी लुप्त होती है।  आपसे यह अपेक्षा की जाती है की आप प्रश्न में प्रयुक्त शैली को पहचान कलर छोटी हुई कड़ी को पूरा करे। श्रृंखला (भाषिक) के अंतर्गत आने वाले प्रश्नो को मौते तौर पर निम्नलिखित तीन भागो में विभाजित किया जा सकता है।

१. संख्या श्रृंखला

२. अक्षर श्रृंखला

३. विविध/ अन्यान्य

6. लुप्त संख्या ज्ञात करना/ बौद्धिक गणित

सामन्य मानसिक योग्यता के अंतर्गत कुछ ऐसे प्रश्न भी दिए जाते है की जिनमे त्वरित मानसिक गणना की आवश्यकता होती है।  क्योकि इस प्रकार के प्रश्नो में कुछ अंको या संख्याओं को किसी ख़ास तार्किक व् ग़नीनतय गणना के आधार पर किसी आरेख डायग्राम (Diagram), चित्र (Figure), या ज्यामितीय आकृति अथवा तालिका या सारिणी में संस्थापित किया जाता है।  अलग अलग समूहों में बंटी संख्याओं में कोई एक संख्या लुप्त या गायब रहती है जिसे शीग्रता से खोज कर सही उत्तर देना होता है।  इस अध्याय के अन्तर्गत सामान्तया बौद्धिक गणित पर आधारित प्रश्न पूछे जाते है।  इस प्रकार के प्रश्नो में एक या एक से अधिक आरेखों में कुछ संख्याये दी जाती है। दी गयी आकृतियों या आरेखों में किसी एक स्थान पर प्रश्नवाचक चिन्ह के रूप में खाली स्थान छोड़ दिया जाता है। आपको प्रश्नवाचक चिन्ह के स्थान पर आने वाली संख्या दिए गए विकल्पों में से ज्ञात करनी होती है।

7. पदानुक्रम –

पदानुक्रम के अंतर्गत सामान्यतयाः कुछ व्यक्तियों (पुरुषों/ महिलाओं) की आयु लम्बाई, ऊंचाई, बुद्धिमता, योग्यता आदि से संबंधित तुलनातमक विवरण दिया जाता है। और इसी आधार पर किसी व्यक्ति विशेष की आयु, ऊंचाई, पद, लम्बाई अथवा स्तिथि आदि से संबंधित प्रश्न पूछे जाते है। आम तौर पर पदानुक्रम पर आधारित प्रश्नो में अभ्यर्थियों से किसी व्यक्ति या वस्तु अथवा स्थान की स्तिथि, ऊपर या नीचे से अथवा बांये या दाएं से अथवा बांये या दाएं से अथवा इसी प्रकार अन्य दृष्टिकोणों से निर्धारित करने की अपेक्षा की जाती है।

पाठ्यक्रम के कुछ प्रमुख प्रकार

पदानुक्रम संबंधी प्रश्नो को उनके स्वरुप अथवा स्वाभाव के आधार पर विभिन्न प्रकारो में बांटा जा सकता है। इनमे से कुछ  प्रमुख परककार निम्नलिखित है।

  1. 1. लम्बाई अथवा ऊंचाई पर आधारित पदानुक्रम
  2. आयु पर आधारित पदानुक्रम
  3. भार/ वजन पर आधारित पदानुक्रम
  4. गन, विशेषण, योग्यता या बुद्धिमता पर आधारित पदानुक्रम
  5. मंचन प्रदर्शन के क्रम, समय या तिथि आदि पर आधारित पदानुक्रम
  6. निर्धारित शर्तों पर आधारित पदानुक्रम
  7. विविध/ अन्य प्रकार के पदानुक्रम

8. वेन आरेख –

किसी व्यक्ति, वस्तु या स्थान, जाती पेशा या व्यवसाय, खेल आदि को जब आरेख (diagram) या किसी ज्यामितीय आकृति (Geometrical Figure) के माध्यम से प्रदर्शित किया जाता है तो वैसी संयुग्मित आरेख व्यवस्था को वेन आरेख (Venn Diagram) कहते है। उल्लेखनीय है की मानसिक योग्यता परिक्षण (Mental Ability test) के अंतर्गत “वेन आरेख” संबंधी प्रश्नो का मत्वपूर्ण स्थान है। वेन आरेख पर आधारित प्रश्न प्रायः दिए गए मदो (items) के  किसी निश्चित समूह को भली भाँती समझने, उनका संबंध स्थापित करने और उनकी आरेखीय व्याख्या करने की योग्यता की जांच के उद्देश्य से दिए जाते है। इस प्रकार के प्रश्नो में कभी कभी कुछ आकृतियों, विषेकर कुछ ज्यामितीय आकृतियों का भी प्रयोग किया जाता है। इन आकृतियों में स्तिथ अंक या वर्ण उन आकृतियों के स्थान विशेष के सम्मुच्य का बोधक होते है।

9. कोडिंग एवं डिकोडिंग ( कूटीकरण तथा आकूटीकरण/ संकेतन और विसंकेतन)-

सामान्यतया कोड जो एक अंग्रेजी भाषा का शब्द है का हिंदी में अर्थ होता है की संहिता, संकेत नियम संहिता, कूट, संहिता बनाना, कूट संकेत, कूट शब्द, संकेत देना आदि। इसी प्रकर का डिकोड का हिंदी में अर्थ होता है की विकोड़न करना, कूट वाचन करना, विसंकेतन करना कूट खोलना, आवकूटन करना आदि। आज कल विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में इससे संबंधी प्रश्न पूछे जाते है। इस प्रश्नावली के अंतर्गत अंग्रेजी वर्णमाला और अंतर्राष्ट्रीय अंको अर्थात A, B, C, D…या a,b, c, d….आदि और 1, 2, 3, 4, 5…. आदि का प्रयोग होता है।   इसमें अंग्रेजी वर्णमाला के विभिन्न अक्षरों  का समूह या अंग्रेजी का कोई शब्द दिया जाता है।  जिसका कोड अंग्रेजी वर्णमाला के अक्षरों या शब्द के रूप में या फिर अंको के रूप में दिया जाता है। इसी के आधार पर दिए गए अन्य शब्द समूह, अक्षर समूह, संख्या, अंक समूह, चिन्हो, प्रतीकों या संकेतों के समूह अथवा इन सभी के मिश्रित रूप का कूट (Code) ज्ञात करना होता है।

A B C D Z को किसी कूट या सांकेतिक भाषा में 1 2 3 4 26 लिखा जाता है तो इसका अर्थ यह है की इसमें

A B C D D Z का कोड क्रमशः 1 2 3 4 26 है क्योकि अंग्रेजी वर्णमाला में इन अक्षरों का क्रम स्थान क्रमशः वही है, जो की अंको द्वारा दर्शाया गया है।

यह प्रक्रिया विपरीत रूप से भी प्रश्न में दी जा सकती है। अर्थात किसी Code का का अर्थ भी पूछा जा सकता है। यथा –

किसी कूट या सांकेतिक भाषा में यादो A B C D Z को 1 2 3 4 26 लिखा जाता है तथा E F G H Y को 5 6 7 8 25 लिखा जाता है तो उसी कूट भाषा में 3 4 5 6 24 का अर्थ क्या होगा अथवा 3 4 5 6 24 को क्या लिखा जायेगा।

A= 1 B= 2 C=  3 D= 4  Z= 26 E= 5 F= 6 24= X

अर्थात अंग्रेजी वर्णमाला में जो इनका क्रम स्थान है उसी को अंको द्वारा प्रदर्शित किया गया है। अतः स्पष्ट है की –

3 4 5 6 24 में से

3= C, 4 = D, 5= E, 6= F, 24= X

में से

3 4 5 6 24 स्थान पर आने वाले अंग्रेजी वर्णमाला के अक्षरों को प्रदर्शित करेगा। इस प्रकार

3= C, 4= D,  5= E,  6= F,  24= X

अतः 3, 4, 5, 6, 24 को C D E F X लिखा जायेगा।

10. विशेलषणात्मक तर्कशक्ति –

विशेलषणात्मक तर्कशक्ति के कुछ प्रमुख प्रकार

कथन और निष्कर्ष (सोदाहरण परिचय)

अनुमान, अनंतरानुमान, मह्याश्रित अनुमान या न्याय (भूमिका)

तर्कवाक्य और उसके विभिन्न प्रकार

पदों की व्याप्ति

तर्कवाक्यों का विरोध

11. वर्ग पूर्ती-

सामान्तया इस प्रकार के प्रश्नो में दी हुई आकृति या चित्र का एक हिस्सा प्रश्न आकृति या समस्या आकृति से गायब रहता है जिसे प्रश्न में दिए गए उत्तर विकल्पं में से ढूँढना होता है। इस प्रकार के प्रश्नो के उत्तर खोजने में यह सावधानी रखने की आसविअकता बोटी है की प्रश्न या समस्या आकृति और सही उत्तर आकृति अर्थात दोनों आकृतियों के आपस में सही तरीके से मिलने पर एक संपूर्ण वर्ग अवश्य बन जाये। इस अध्याय के अंतर्गत आने वाले प्रश्न दो इसकाइयो में विभाजित होते है-

समस्या आकृति

समाधान आकृति

कभी कभी ये दोनों इकाइयां एक विभाजक रेखा द्वार विभाजित होती है। समस्या आकृति अथवा प्रश्न आकृति विभाजक रेखा (जो सामान्तया काल्पनिक होती है परन्तु यह वास्तविक भी हो सकती है) के बांयी ओर होती है जबकि चार उत्तर आकृतियां (काल्पनिक या वास्तविक) विभाजक रेखा के दाहिनी ओर चार विकल्पों a,b,c,d अथवा 1, 2, 3, 4) के अंतर्गत दी जाती है।  आपको उत्तर आकृतियों में से ऐसी आकृति चुननी होती है जो प्रश्न आकृति के अधूरे भाग को पूरा कर एक सम्प्पोर्ण वर्ग का निर्माण करती हो। इस प्रकार के प्रश्नो को हल करते समय कई बार भ्रम की स्थिति पैदा होती है ओर एक से अधिक आकृतियां एक प्रश्न का उत्तर प्रतीत होती है। ऐसी परिस्तिथि में आपको चाहिए की आप पहले समस्या आकृति यानि वर्ग के अधूरे भाग के आकार, प्रकार एवं उसके स्वरुप के प्रत्येक उतार चढ़ाव का अत्यन्त सावधानीपूर्वक अवलोकन कर उसके संभावित सही उत्तर का अनुमान लगाए ओर उत्तर आकृतियों में से अनुमानित सही आकृति को चुनकर प्रश्न के उपयुक्त उत्तर को निर्दिष्ट विधि से दर्शावे।

12. आकृति पूर्ती

आकृति पूर्ती प्रकार के प्रश्नो का “अभाषिक मानसिक योग्यता परिक्षण” या अभाषिक तर्कशक्ति परीक्षण में अपना एक विशिष्ट स्थान है। इस प्रकार के प्रश्नो में समस्या आकृति के रूप में दी गयी किसी आकृति या आकृतियों के समूह के एक लुप्त भाग को खोजना होता हैं। जो उसी प्रश्न में दिए गए विकल्पों में से किसी एक में निहित रहता है।

इस प्रकार के अंतर्गत आने वाले प्रश्न दो इकाइयों में विभाजित रहते है-

समस्या आकृति (प्रश्न आकृति)

समाधान आकृति (उत्तर आकृति)

कभी कभी ये दोनों इकाइयां एक विभाजक रेखा (जो सामान्तया काल्पनिक होती है किन्तु वह वास्तविक भी हो सकती है) द्वारा विभाजित होती है।

समस्या आकृति इस विभाजक रेखा के बांयी ओर होती है जबकि चार उत्तर आकृतियां विभाजक रेखा के दाहिनी ओर होती है। पहली इकाई में दी गयी समस्या आकृति प्रायः चार भागो में निम्नलिखित रूप में विभाजित रहती है।

14
23

या

12
34
12
34
13
24

समस्या आकृति के इन चार भागो में से एक भाग रिक्त, लुप्त अथवा गायब रहता है। आपको इसी लुप्त भाग को दी गयी उत्तर आकृतियों में से ढूंढ कर उत्तर देना होता है। सही उत्तर वही होता है जो पहली इकाई में दी गयी समस्या आकृति के लुप्त भाग को सही ढंग से पूर्ण करता है।

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